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पहल

‘मशरूम गर्ल’ दिव्या रावत 4 हजार महिलाओं को देगी रोजगार 

ग्रामीण महिलाओं के साथ कोऑपरेटिव और MSME के जरिए उद्यमिता की नई उड़ान भरने की तैयारी 

मशरूम की खेती में कामयाबी के झंडे गाड़ चुकी सामाजिक उद्यमी दिव्या रावत अब उत्तराखंड की हजारों महिलाओं को साथ लेकर कोऑपरेटिव और लघु उद्यम (MSME) के क्षेत्र में कुछ बड़ा करने जा रही हैं। जिससे ना सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि कारोबार में उनकी हिस्सेदारी भी होगी। 

दैनिक अखबार ‘हिंदुस्तान’ द्वारा आयोजित शिखर समागम में उत्तराखंड की मशरूम ब्रांड एंबेसेडर दिव्या रावत ने बताया कि वे मशरूम से जुड़ा एक नया मॉडल ला रही हैं। इसमें करीब चार हजार महिलाओं को साथ जोड़ा जाएगा। कल्टीवेशन और कलेक्शन का मॉडल कॉपरेटिव होगा, जबकि प्रोसेसिंग MSME आधारित रहेगी। मशरूम के अलावा किसानों से सीजनल सब्जियां भी खरीदी जाएंगी।

10 साल में बनाई पहचान

10 साल पहले महज 23 साल की उम्र में 20 हजार रुपए की पूंजी से दिव्या रावत ने मशरूम के काम में कदम रखा था। इस क्षेत्र में धूम मचा चुकी दिव्या आज सालाना करीब 20 करोड़ रुपए का कारोबार करती हैं। जिसे अगले कुछ वर्षों में 200 करोड़ रुपए तक पहुंचाना चाहती हैं। वे बताती हैं कि उनके मशरूम 100 रुपए किलो से लेकर साढ़े तीन लाख रुपए किलो (कीड़ाजड़ी) तक बिक रहे हैं।

रिवर्स माइग्रेशन का प्रेरक उदाहरण

उत्तराखंड के चमोली जिले में जन्मी दिव्या रावत ने सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद दिल्ली में नौकरियां भी कीं। लेकिन कुछ अलग करने के इरादे से वापस लौटीं और 2013 में देहरादून के मोथरोवाला में एक कमरे से मशरूम की खेती शुरू कर दी। उनकी सक्सेस स्टोरी रिवर्स माइग्रेशन का भी प्रेरक उदाहरण हैं। आज उनकी कंपनी के मशरूम प्रोडक्ट्स देश-विदेश में पहुंच रहे हैं।

महिलाएं होंगी शेयर होल्डर

दिव्या रावत उम्मीद जताती हैं कि उनके नए उद्यम के जरिए उत्तराखंड की हजारों महिलाएं महीने में कम से कम 25 से 30 हजार रुपए कमाएंगी। इस परियोजना का बिजनेस मॉडल करीब 50-60 करोड़ रुपए का बनेगा और MSME के तहत एक प्रोसेसिंग यूनिट भी होगी। इससे जो महिलाएं जुड़ेंगी वो शेयर होल्डर भी होंगी। देश में कोऑपरेटिव सेक्टर के सफल उदाहरणों की तर्ज पर उत्तराखंड के कोऑपरेटिव क्षेत्र में यह बड़ी पहल होगी। 

ट्रेनिंग से ट्रेडिंग तक

दिव्या रावत के उद्यम की खास बात यह है कि खुद मशरूम से जुड़े बिजनेस करने के अलावा दूर-दराज गावों के किसानों और महिलाओं को मशरूम की खेती, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के गुर भी सिखाती हैं। उनका काम ट्रेनिंग से ट्रेडिंग तक फैला है। दिव्या रावत ने देहरादून में ‘मशमश’ नाम से एक रेस्तरां भी शुरू किया है, जिसमें मशरूम के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाते हैं। यह रेस्तरां भी अपनी खास पहचान बना चुका है।

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